ऍसोटेरिक
सोसायटी ऊर्जा
के माध्यम से प्यार
और बुद्धिमता की
दूसरी किरण (या धारा) द्वारा
शुद्ध (श्वेत) भ्रातृत्व
से जुड़ी है। सात किरणों में
से यह दूसरी किरण
अपने हल्के नीले
रंग द्वारा जानी
जाती है । प्राप्त
जानकारी के आधार
पर हम यह निष्कर्ष
निकाल सकते हैं
कि विषेशकर दूसरी
किरण के समूहों
का लक्ष्य मानवता
में आंतरिक चेतना
को जगाना है जिससे
कि कुंभ-युग में
सामूहिक चेतना
का विकास हो सके
।
ऍसोटेरिक
सोसायटी ने चार
लक्ष्य बनाए हैं
:-
- जाति, धर्म, रंग, सामजिक-श्रेणी
या लिंग भेद रहित
मानवता के विश्व-बंधुत्व
का निर्माण;
- धर्म और दर्शन
के तुलनात्मक अध्ययन
को प्रोत्साहन
देना;
- प्रकृति के
अनिर्वचनीय नियमों
और मानवमात्र की
अव्यक्त आध्यात्मिक
शक्तियों के विषय
में अनुसंधान करना;
- संसार के सभी
आध्यात्मिक / ऍसोटेरिक
आंदोलनों का एकीकरण
।
ऍसोटेरिक
सोसायटी के लोगो
में दो सांप दिखाए
गये हैं जो एक-दूसरे
की पूंछ को काटते
हुए एक वृत्त बना
पूर्ण चेतना का
मार्ग दिखाते हैं
। यह द्वैतवाद
का प्रतीक है जो
अंततः, जन्म और
पुनर्जन्म के माध्यम
से, समरसता प्राप्त
करेगा और इसके
कारण, "शून्य"
का आकार, जो
कि एक दैवी प्रतीक
है, अल्फा और ओमेगा
का आकार बनायेगा
।
सफ़ेद
और काला साँप प्रकृति
और पुरुष, शिव
व शक्ति के प्रतीक
हैं । चूंकि नौ
भौतिक और आध्यात्मिक
पूर्णता का अंक
है अतः दोनों सर्पों
पर नौ तिकोने शल्क
हैं : नौ तीन का
तीन गुणा होता
है, और नौ का प्रयोग
करने से होने वाले
हर हिसाब के परिणाम
का समानयन नौ में
होता है : उदाहरण
के लिये: 5×9= 45,. इसका अर्थ है 4+5=9.
आंतरिक
वृत्त के चार क्षेत्र
होते हैं । यह
पृथ्वी "गेआ" का
प्रतीक हैं (चार
धरती का अंक है)
। चार चतुर्थांश
धरती पर चार पवन-दिशाओं
और चार तत्त्वों
का प्रतीक हैं
। केंद्र पांचवे
तत्त्व, पारलौकिक
वृत्त, का प्रतीक
है जिसके द्वारा
प्रत्येक वस्तु
का रूपांतरण हो
जाता है । सांप
के तिकोने शल्क
से ब्रह्मांड सूर्य
से पृथ्वी और पृथ्वी
से ब्रह्मांड सूर्य
उत्पन्न होता है; ये ब्रह्मांड
और धरती की पारस्परिक
क्रिया का प्रतीक
हैं ।
यह
पूरा चित्र एक
शल्क के ऊपर है, जिस
पर लिखा है : प्रेम
और बुद्धिमता की
दूसरी किरण । यह इस बात का प्रतीक
है कि प्रेम और
बुद्धिमता संसार
का जीवनदायी शल्क
है ।