Esoteric Society


of the Circle of the Connected



परिचय

1985 में नैधरलैंड्ज में एसोटेरिक सोसायटी ऑफ ध सर्कल ऑफ ध कनेक्टेड की स्थापना हुई थी जो शुरू में एसोटेरिक(गोपनीय, दीक्षणीय/कुछ खास दिक्षित लोग ही समझ पाये ऎसे समूह को एसोटेरिक कहते है) केन्द्रित समूह था. आज इस सोसायटी को सिर्फ ध एसोटेरिक सोसायटी के नाम से ही जाना जाता है जो दान एकरमेन माध्यम के जरिए ट्रांस सेशन द्वारा प्रसारित हुई जानकारी पे कार्य करने में अपना ध्यान केन्द्रित करती है. जानकारी में नये युग, एक्वेरियस(कुम्भ) युग पर ज्यादा ज़ोर दिया जाता है.

यह जानकारी व्हाईट ब्रधरहूड के मास्टर्स के कलेक्टिव (सहकारी संस्थान) में से आती है. यह कलेक्टिव कॉस्मॉस (ब्रह्माण्ड) में स्थित है. मास्टर्स ने अवतार और पुन:अवतार का रास्ता तय कर लिया है और अन्तर्द्रुष्टि से मानव समुदाय को प्रेरित करना व मीन(पाईसिझ) युग में से कुम्भ युग में पारगमन करने में उसका साथ देना ये उन के मकसद है.

यहां प्रयोजित व्हाईट शब्द को कोई जाति या त्वचा के रंग से कोई वास्ता नहीं है. व्हाईट का मतलब है, व्हाईट लाईट, सफेद प्रकाश, एसा प्रकाश जिस में वर्णक्रम के सभी रंग का प्रतिनिधित्व होता है. तमाम भौतिक एवम अभौतिक सभी पदार्थमें से सफेद प्रकाश बहता है और इन पदार्थ के चारो और वह मौजूद होता है. ब्रधरहूड पदार्थ की जाति के बारे में कुछ नहीं कहता. वे पुरुष या स्त्री नहीं है. ब्रधरहूड एकता, समानता और पारस्परिक ध्यान का प्रतीक है.

ध ग्रेट इन्वॉकेशन (महान आह्वान, प्रार्थना) से ट्रांस सेशन की शुरुआत होती है जिस के बाद जटिल ध्यान किया जाता है. ध ग्रेट इन्वोकेशन मूलत: अंग्रेजी में एलिस ए. बेईली के जरिए कॉस्मॉसमें से प्रसारित किया गया था जिस का डच में अनुवाद किया गया है और व्हाईट ब्रधरहूड के मार्गदर्शन में इस तरह से परिवर्तित किया गया है कि कुम्भ युग की नयी ऊर्जा से इसका अच्छी तरह ट्यूनिंग होता है. आप ध ग्रेट इन्वॉकेशन को आध्यात्मिक दुनिया से सेशन समूह का ओजस्वी समस्वरण स्थापित करने के मकसदवाली एक प्रार्थना मान सकते है.

ग्रेट इन्वॉकेशन के पठन के बाद जटिल ध्यान क्रिया की जाती है जिसमें तारतम्य (हायरार्कि) के साथ संधान रचने के लिए समूह में प्रकाश के थंभे की कल्पना की जाती है. उस के बाद परछाईयों के भाई (ध ब्रधर्स ऑफ शेडॉ) की और से नकारात्मक असर से इस संधान को रक्षण देने के लिए प्रकाश का गुम्बज बनाया जाता है. परछाईयों के भाई शुद्ध सफेद प्रकाश चमकाते है और आदमी आध्यात्मिक रूप से विकसित न हो और पदार्थ, नफरत और डर जैसी सांसारिक चीज़ो से जुडा रहे एसा चाहते है.  

दान एकरमेन समाधि (ट्रांस) में जाये उस से पहले वह प्रकाश के रचे हुए संधान में उर्जा और तत्व के बारे में अपनी तीसरी आंख (छठा चक्र या मस्तक चक्र) से क्या देखते है उसका वर्णन करते है. पांचवे चक्र (कंठ चक्र) के जरिए संधान (कनेक्शन) रचा जाता है और तब ट्रांस एक हकीकत होती है. दान के अलावा इसे और अच्छा कौन समझा सकता है? वह कहते है:

"कुछ पुरानी धार्मिक पैंटीग्ज पर मेरे साईकोमेट्रिक्स का प्रयोग करने के बाद पहला आकस्मिक ट्रांस 1985 में हुआ था. पहले ट्रांस के वक्त मैं पूरा तैयार नहीं था लेकिन मैं मानता हूं कि उस में कुछ आध्यात्मिक तैयारी थी. लेकिन उस के बारे में हमे उस वक्त पता नहीं था.

चूंकि ज्यादा से ज्यादा ट्रांस सेशन्स का आयोजन होता गया इसलिए मैं तैयारी और थोडे ध्यान की जरूरत, व्हाईट ब्रधरहूड, कुछ हलके-फुलके लोग, और मास्टर्स से कम से कम थोडी बहोत ट्यूनिंग की ज्यादा से ज्यादा जरूरत महसूस करता गया. व्हाईट ब्रधरहूड द्वारा समय से पहले कई हफ्तो तक और कभी कभी महिनो पहले ट्रांस सेशन्स बनाये जाते है और जैसा कि जवाब देखने से पता चलता है कि प्रश्नो की तैयारी के वक्त मास्टर्स पहले से हाज़िर होते है. आयोजित होनेवाले ट्रांस सेशन्स के लिए हम भी खुद को तैयार करते है. नियमित सेशन प्रवचन के वक्त सत्कारिणी शुद्धि की विधि करती है और करीब एक घंटे पहले मैं अवकाश की कल्पना करके और उसको प्रकाश में रखकर खुद को तैयार करता हूं.

ध ग्रेट कॉल (महान आह्वान) के साथ सेशन की शुरूआत होती है जिसके बाद ध्यान किया जाता है जिसमें अंत में हथेलीयों के जरिए वर्तुल की मध्य में प्रकाश को बहाकर प्रकाश का थंभा रचा जाता है.

ध्यान के दौरान मैं अपनी तीसरी आंख के जरिए सभी तरह के रंगो और कभी कभी मार्गदर्शको को देखता हूं जो हाजिर लोगो के साथ होते है. व्हाईट ब्रधरहूड के हलके-फुलके लोग ध्यान के दौरान और कभी कभी उस से पहले भी हाजिर होते है.

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ध्यान करते वक्त हाजिर लोगो की आसपास करीब दस मीटर व्यास की प्रकाश की वृत्ताकार अंगूठी दिखती है. इस वर्तुल से प्रकास उपर ऊठता है जो धीरे से गुम्बज बनाता है. यह गुम्बज बाद में खुद को प्रकाश के थंभे से जोडता है जिसकी हमने ध्यान के दौरान कल्पना की थी. उस के बाद मैं गुम्बज में खडे हुए हाज़िर लोगो, अलग अलग मार्गदर्शको और मास्टर्स के पीछे एक बडा वर्तुल देखूंगा. इस समय के दौरान गुम्बज के रंग बदले हुए है. शुरू में वह सामान्यत: सफेद था. अब वह नीलक, नीला, जामुनी, रूपहला और सुनहला है जिसका मेरी द्रष्टि में अर्थ यह है कि मास्टर्स के साथ ट्यूनिंग में और भी सूक्ष्म भेद हुआ है. बाद में ध्यान में ट्यूनिंग के दौरान संगीत या गायन भी सुनाई देता है. लॉझ (बक्सा) में से कई आध्यात्मिक लोग ऊपर से देखते है कि वहां नीचे भी क्या हो रहा है.

ट्रांस के दौरान मैं संपूर्ण खो जाता हूं और सेशन के दौरान क्या होता है वो मुझे पता नहीं होता. ट्रांस में जाने से पहले मुझे गरदन और कंधे के भाग में चुभन होती है और मुझे जडवत भारी स्थित महसूस होती है जैसे कि नींद की तीव्र ईच्छा होती हो.

जब मैं ट्रांस से जागता हूं तो उसे आप नींद में से जागने की क्रिया के साथ तुलना कर सकते है. कभी कभी मैं कहां हूं ये महसूस होने में थोडा वक्त लगता है. इसलिए मैं जब ट्रांस में हूं तो कहां हूं? मेरे लिए यह एक स्वप्न समान है, कभी कभी नीलक और जामुनी रंगो की प्रकाशित दुनिया में होने की अनुभूति जहां मैं हलके-फुलके लोगो से मिलता हूं जो मुझे हर तरह की जानकारी देते है. पूरे आदेश! एक तरह के प्रवचन जो मैं संभवत: फिर से दोहरा नहीं सकता. लेकिन यह वाकई अदभुत है और बेहद दिलचश्प है. कभी कभी मैं जो प्रवचन देता हूं उस दौरान आध्यात्मिक आदेश के अंश अनायास आते रहते है. फिर भी मुझे शक है कि ये आदेश मेरी उच्चतम चेतना में कहीं पर संग्रहित हुए है.

जब मास्टर्स खुद की पहचान अनावृत्त करते है तब वे सेशन समूह को आवकार देते है और कई बार परिचय देते है. उस के बाद उन सेशन समूह में हाजिर हम सब को प्रश्न पूछने का मौका दिया जाता है. कौन से प्रश्न पूछे जायेंगे यह ट्रांस मीडियम को कभी पहले से मालूम नहीं होता इतना ही नहीं उसे प्रश्न भी पता नहीं होते. मास्टर्स के किस्से में एसा नहीं होता. वह प्रश्न को पहचानते है और उनका मकसद जानते है. उसके बाद सबसे सुंदर जवाब दिये जाते है. यह एक आहलादक अनुभव है. प्रश्न का विषय क्या है इसके आधार पे विविध मास्टर्स हम से बात करते है. भविष्यवाणियां भी की जाती है, एसी भविष्यावाणियां जो सच हुई है लेकिन सनसनी की वजह से नहीं पर समूह को दिखाने के लिए की वह शुद्ध ऊर्जा से जुडी हुई है.

हमें जो प्रश्न बारंबार पूछा जाता है वो यह कि क्या ट्रांस मीडियम जवाबो को असर कर सकता है. दूसरे शब्दो में: मास्टर्स द्वारा प्रसारित की गई जानकारी ट्रांस मीडियम के व्यक्तित्व से घिर सकती है और लेखिनी व धारणाओ के जरिए उसे जो ज्ञान है वो ट्रांस के दौरान उसे मिल रहे जवाबो को प्रभावित कर सकता है? जवाब साफ़साफ़ ना है और इस धारणा को आधार देने के लिए हमने मास्टर को यह प्रश्न पूछा है.

14 जान्युआरी, 2002 के सेशनमें से

3. मीडियम का व्यक्तित्व दी गई जानकारी को प्रभावित करता है?

सिर्फ शब्दावली, व्यक्तिगत शब्द और शब्दो का ज्ञान जानकारी को प्रभावित करता है. फिर भी व्यक्तिगत, तार्किक, शिक्षणीय जानकारी हम जो जानकारी दे रहे है उसे प्रभावित नहीं करती. हम जिस परिमाण में स्थित है वहां वाचा नहीं है, कोई शब्द नहीं है. हम कुछ प्रकर की टेलिपथिक प्रसार, कुछ आवृत्तियों से संवाद करते है एसा आप मान सकते है. इन आवृत्तियों को शब्द देने के लिए हम खुद को मीडियम के वाचा केन्द्र से जोडते है जिस के जरिए हम बोल सकते है, मीडियम जानता हो ऎसे शब्द ढूंढ सकते है और इसके द्वारा हम वाक्य रचते है, आवृत्तियों को, टेलिपथी को और संवेदनाओ को शब्द देते है.

जो मीडियम नहीं है और इसे ज्यादा जाग्रत रूप से करता है वह खुद को खोलता है और अपने आप संवेदनाओ को रूपांतरित करता है. ऎसे मीडियम के किस्से में वाचा केन्द्र के जरिए संवेदनाओ को चुना जाता है और आकार दिया जाता है. मीडियम के साथ जैसे जैसे संपर्क बढता है वैसे शब्द ढूंढने और जोडने की संभावना भी बढती है. मीडियम जिन्हे अच्छी तरह जानता है ऎसे शब्द हम जानते है और हमने खुद को दस बुद्धि की बहुसंख्या को माध्यम से जोडा है. उस की शब्दावली, उस की जानकारी के जरिए हम में से कई लोग मीडियम को अच्छी तरह जानते है और इसलिए हम जो अलग अलग जानकारी देते है उस के लिए अलग अलग शब्दो का प्रयोग कर सकते है. हम जो शब्द का प्रयोग करते है उससे हमे पहचानने में आपको कोई आपत्ति नहीं होनी चाहिए. मीडियम के पास जो जानकारी है वह उससे जुडी हुई शब्दावली और कुछ प्रश्न के किस तरह से जवाब दिए जाते है सिर्फ उस से सुसंगत है. हालांकि लेखिनी और धारणाओ के जरिए मीडियम के पास जो जानकारी है वह हम जो जानकारी देते है उसे प्रभावित नहीं करती.

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सेशन्स को टेप/डिस्क पे रिकॉर्ड किया जात है और बाद में उन पर कागज़ी काम होता है. सेशन रिपॉर्ट हमारी मासिक पत्रिका पार लांटो में प्रकाशित होते है. सिर्फ मास्टर्स खुद को कलेक्टिव के रुप में ज़ाहिर करना चाहते है और मास्टर्स के नाम ज़ाहिर करना नहीं चाहते, फिर भी एक सेशन से हमे पता चलता है कि कम से कम एक मास्टर लांटो कलेक्टिव का हिस्सा है. इसलिए हमने हमारी मासिक पत्रिका का नाम पार लांटो रखा है.

मास्टर्स की बनी हुई कलेक्टिवने पुष्टि की है की मास्टर लांटो वाकई में ट्रांस सेशन पर हाज़िर होते है. किस्सा क्या था? ट्रांस की शुरुआत से थोडी ही देर पहले मीडियम ने चीनी दिखाववाले तत्व को देखने हुए का उल्लेख किया. हमें आश्चर्य हुआ कि शायद वह मास्टर लांटो हो सकते है. बाद के सेशन में हमने पूछा.

14 जान्युआरी, 2002 के सेशन में से

1 पिछले सेशन के दौरान हमारे मीडियमने चाईनीज़ दिखाववाला एक तत्व दिखा. क्या वह मास्टर लांटो हो सकते है?

मास्टर आपके समूह की ऊर्जा, आपके मकसद से नियमित रूप से जुडे रहेंगे. ये जानकर अच्छा लगता है कि आपके समूह की ऊर्जा से जुडाव इतना मज़बूत और सकारात्मक है कि आपके समूह का कार्य इतना फलदायी और यशस्वी होता है और कई लोग हम ऊर्जा और जानकारी देते है उस से खुद को जोड सकते है. ऊर्जा के क्षेत्रो से मास्टर लांटो जुडे हुए है जिससे अधिक से अधिक लोगो तक प्रसार हो सके जो मह्त्वपूर्ण स्थितियों में ऊर्जा और जानकारी फैलायेंगे. आपके सामंजस्य, प्रतिबद्धता और आपको जोडनेवाली शक्ति और कॉस्मॉस को आपने दिये हुए विश्वास की बदौलत यह संभवित है.

प्रेम और चातुर्य की दूसरी किरण (और प्रवाह) के जरिए ध एसोटेरिक सोसायटी ऊर्जा के रूप से व्हाईट ब्रधरहूड से जुडी हुई है. सात किरणों में से दूसरी अपने नीले रंग से जानी जाती है. प्राप्त हुई जानकारीसे कोई यह तय कर सकता है कि दूसरी किरण के समूह का मिशन है आंतरिक चेतना को मानव समुदाय के करीब लाना जिस से कुम्भ युग में सामूहिक चेतना विकसित हो सके.

ट्रांस सेशन्स के जरिए सालो तक प्रसारित की गई जानकारी की बदौलत दो किताबो का संकलन हो सका है. आगे और भी किताबे प्रकाशित होंगी. इन किताबो के बारे में ज्यादा जानकारी के लिए हम आपको वेबसाईट के कॉस्मिक मिशन सेक्शन पढने की गुज़ारिश करते है. किताबे पढते वक्त हमने ले-आऊट कैसे चुना है यह जानना मह्त्वपूर्ण है. हर अध्याय संक्षिप्त परिचय से शुरू होता है जिस में हम अहम मुद्धे और उस अध्याय के कॉस्मिक नियमो का वर्णन करेंगे. उसके बाद प्रश्न और जवाब दिये गये है. हमने मास्टर्स के जवाबो को पुन:प्रगट करने का निर्णय लिया है. जहां संभव हो वहां कालक्रमानुसार और संपूर्ण साहित्यिक रूप से जवाब देने की कोशिश की गई है. एकाद विरामचिह्न को छोडकर मूल-पाठ को बदला नहीं गया है जिस से लेखक के अनचाहे अर्थघटन द्वारा एसोटेरिक सोसायटी के सत्य का ह्रास न हो. आप देखेंगे की सही समय पर जवाब ज्यादा विस्तृत बनेंगे. कुछ विषय से संबंधित सभी जवाबो का प्रसार करना हमने तय किया है जिससे आप भी जवाबो में प्रगति देख पायेंगे. कई जवाब एक जैसे लग सकते है. हालांकि सूक्ष्म भेद और नया ईज़ाफा इस मुद्दे पर प्रकाश डाल सकता है.

यह पाठ साहित्यिक रुप से पुन:प्रगट किया गया है इसलिए आप कुछ ऎसे परिच्छेद पढेंगे जो व्याकरण की द्रष्टि से संपूर्ण सही नहीं है और आप गौण उपवाक्य और अतिरिक्त वाक्य पायेंगे. इससे शुरु में आपको जवाब पढने में दिक्कत होगी. जैसे जैसे आप ज्यादा पढते जायेंगे, यह छोटे विघ्न दूर हो जायेंगे और हमारे साथ आप भी नये युग के बारे में अतिसुंदर जानकारी ले के धन्य हो जायेंगे.

इस पठन के कई स्तर है. ध व्हाईट ब्रधरहूड हंमेशा कहता है कि हर आदमी पढता है और अपने को उनके के स्तर पे ले जाता है. इसका अर्थ है कि हर अध्याय का परिचय फिलहाल हमारा अर्थघटन है जो हमारी आवृत्ति में से दिया गया है. संभव है कि आप इन जवाबोमें से अन्य जानकारी पा सकेंगे.


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